Friday, September 27, 2019

When Do Women And Men Feel Most Sexually Active In Hindi

सर्वेक्षण से पता चलता है कि महिला और पुरुष अलग-अलग समय पर सेक्शुअली अ‍ॅक्टिव फील करते हैं, जिससे कि शारीरिक संपर्क की उनकी इच्छा अलग-अलग समय पर जागती है।

इसलिए यदि आपको लगता है कि आपका साथी कम शारीरिक सम्बन्ध बनाता है, तो यह उसके अलग समय पर सेक्शुअली अ‍ॅक्टिव फील करने के कारण हो सकता है। आज हम इस लेख में इस बारे में कुछ रोचक और अद्भुत बातें बताने जा रहे है, तो आइये इस बारे में विस्तार से जानते है...

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सबसे ज्यादा किस समय पुरुष और महिलाएं उत्तेजित होती है? | What time do men and women get excited the most?


रिपोर्ट के अनुसार, एक कंपनी द्वारा २३०० वयस्कों के साथ एक सर्वेक्षण किया गया था। उनमेसे लगभग ७० प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उनकी सेक्स ड्राइव (sex drive) उनके और उनके साथी से मेल नहीं खाती। क्योंकि दोनों अलग-अलग समय पर उत्तेजित होते हैं। यह मुख्य रूप से महिलाओं और पुरुषों के विभिन्न हार्मोन चक्र (hormone cycle) के कारण होता है।

पुरुषों का कहना है कि वे अपने दिन की शुरुआत सुबह ६ से ९ बजे के बीच शारीरिक संबंध बनाकर करना चाहते हैं। उनमे रात में ११ से २ बजे के बीच यौन संबंध बनाने की इच्छा जागृत होती है। कुल मिलाकर देखा जाये तो, पुरुष सुबह ७ से ८ बजे के दौरान सबसे अधिक उत्तेजित होते हैं। वही महिलाएं रात को ११.३० बजे ज्यादा उत्तेजित होती है।

पुरुषों और महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कब ज्यादा होता हैं? | When are testosterone levels higher in men and women?


सुबह में पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अधिक होता है। जबकि महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। लेकिन उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर उनके मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) पर भी निर्भर करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जहां महिलाएं लचीली (flexible) होती हैं, वहीं पुरुषों की इच्छा सीधे समय पर आधारित होती है। महिलाओं की सेक्स ड्राइव समय से परे कई चीजों से प्रभावित हुई है। लेकिन अलग-अलग शेड्यूल से सेक्स लाइफ खत्म नहीं होनी चाहिए।

महिलाएं सबसे अधिक यौन सक्रियता कब महसूस करती है? | When do women feel most sexually active?


सर्वेक्षण के अनुसार, महिलाओं की कामेच्छा अधिक जटिल, अधिक मनोवैज्ञानिक है। इसका उनके पार्टनर से कोई लेना-देना नहीं है। यदि वे अच्छा आत्मसम्मान महसूस करते हैं और उत्तेजित होते हैं, तब वे निस्संदेह शारीरिक संबंधों के लिए आगे बढ़ेंगी। उस समय, वे संभोग का अनुभव करने की अधिक संभावना रखते हैं, चाहे कोई भी समय हो।

आप कितनी बार सेक्स करते हैं या नहीं करते हैं, इसका गिल्ट (guilt) छोड़कर भी एक अच्छा लैंगिक जीवन (sex life) हासिल कीया जा सकती है। अक्सर महिलावोंकी तबतक शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा नहीं होती, जब तक कि पार्टनर के साथ फोरप्ले शुरू न हो जाए। जो ऐसा कहता है, उसके बारे में मत सोचो। वही करें जो आपका मन कहता है।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

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Thursday, September 26, 2019

Hemophilia Disease Symptoms, Causes, Treatment, and Types in Hindi

अगर आपको कभी थोड़ी चोट लगाती है और उससे खून बहता है, लेकिन कई उपायों के बाद भी खून नहीं रुकता है? तब आपको हीमोफिलिया (Hemophilia) हो सकता है। हीमोफिलिया (Hemophilia) एक आनुवांशिक बीमारी है। इस बीमारी में चोट लगाने के कुछ मिनटों के बाद भी रक्त बहता रहता है। फिर चाहे कितने भी उपाय करें, खून नहीं रुकता है।

अगर हीमोफिलिया (Hemophilia) से पीड़ित व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना होती है या उसे कोई गंभीर बीमारी होती है, तो उसे अपनी जान भी गावनि पड़ सकती है। क्योंकि इस बीमारी में खून रुकता नहीं है, और बहुत अधिक खून बह जाता है। जिसके कारण शरीर में खून  की कमी के कारण उस व्यक्ति के जान को खतरा हो सकता है। इस लेख में आज हम आपको इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

हीमोफिलिया क्या है? | What is Hemophilia?

हीमोफिलिया (Hemophilia) एक विरासत में मिली हुई आनुवांशिक बीमारी है जो रक्त के थक्के (Blood clots) बनाने के लिए शरीर की क्षमता को बाधित करता है, जो की रक्तस्राव को रोकने के लिए एक आवश्यक प्रक्रिया होती है। इससे लोगों को चोट लगने के बाद लंबे समय तक रक्तस्राव होता है और जोड़ों या मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है।

थक्के के 13 प्रकार के कारक (clotting factors) होते हैं, और ये रक्त के थक्के (blood clot) की मदद करने के लिए प्लेटलेट्स (platelets) के साथ काम करते हैं। प्लेटलेट्स छोटी रक्त कोशिकाएं होती हैं जो आपके अस्थि मज्जा (bone marrow) में बनती हैं।

हीमोफिलिया के कारण | Causes of Hemophilia


विशेषज्ञ के अनुसार, हीमोफिलिया (Hemophilia) का सबसे आम कारण रक्त में प्रोटीन की कमी है। जिसके कारण ब्लड क्लॉटिंग फॅक्टरपर परिणाम दिखाई देते है। शरीर में जख्म होने के बाद खून रुकने के लिए blood clotting factor मदद करता है।

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हीमोफिलिया के प्रकार | What are the Types of Hemophilia?


हीमोफिलियाके तीन प्रकार के होते हैं ... हीमोफिलिया ए, बी और सी।

हीमोफिलिया ए | Hemophilia A


हीमोफिलिया ए सबसे सामान्य प्रकार का हीमोफिलिया है, और यह ब्लड कारक VIII में कमी के कारण होता है। हीमोफिलिया वाले 10 में से आठ लोगों में हीमोफिलिया ए होता है।

हीमोफिलिया बी | Hemophilia B


हीमोफिलिया बी, जिसे क्रिसमस रोग भी कहा जाता है, जो कारक IX की कमी के कारण होता है।

हीमोफिलिया सी | Hemophilia C


हीमोफिलिया सी इस बीमारी का सबसे हल्का प्रकार है जो कारक XI की कमी के कारण होता है। इस प्रकार के हीमोफिलिया वाले लोग अक्सर सहज रक्तस्राव का अनुभव नहीं करते हैं। आघात या सर्जरी के बाद आमतौर पर रक्तस्राव होता है।

बेहद दुर्लभ मामलों में, हीमोफिलिया जन्म के बाद विकसित हो सकता है। इसे "अधिग्रहित हीमोफिलिया" (acquired hemophilia) कहा जाता है। यह उन लोगों में होता है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) एंटीबॉडीज बनाती है जो कारक VIII या IX पर हमला करते हैं।

हीमोफिलिया के लक्षण क्या हैं? | What Are the Symptoms of Hemophilia?


आपके लक्षणों की सीमा आपके कारक की कमी की गंभीरता पर निर्भर करती है। आघात के मामले में मामूली कमी वाले लोगों को खून बह सकता है। एक गंभीर कमी वाले लोग बिना किसी कारण के खून बह सकता है।

सहज रक्तस्राव निम्नलिखित कारणों से हो सकता है:

• कटने या गहरी चोट से
• सर्जरी या दंत चिकित्सा के बाद अस्पष्टीकृत और अत्यधिक रक्तस्राव
• कई बड़े या गहरे घाव
• मूत्र या मल में खून
• टीकाकरण के बाद असामान्य रक्तस्राव
• आपके जोड़ों में दर्द, सूजन या जकड़न

हीमोफीलिया पर उपचार क्या है? | what is the treatment for hemophilia?



हीमोफिलिया के लिए प्राथमिक उपचार फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी (factor replacement therapy) है। जिसमें क्लॉटिंग फैक्टर (clotting factor) को replace करने का काम किया जाता है। इस थेरेपी में, रक्त प्लाज्मा (blood plasma) को एकत्र किया जाता है और उसे शुद्ध किया जाता है।

हीमोफिलिया ए का इलाज prescription hormone के साथ कर सकता है। इस हार्मोन को डेस्मोप्रेसिन (desmopressin) कहा जाता है। जिसे डॉक्टर इंजेक्शन के रूप में आपकी नस में दे सकते हैं। यह दवा रक्त के थक्के (blood clots) बनने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार कारकों को उत्तेजित करके काम करती है।

हीमोफिलिया से पीड़ित लोगों को इसका ध्यान रखना चाहिए | haemophilia patients should take care of this

• हीमोफिलिया के रोगियों को अक्सर सलाह दी जाती है कि वे अपने दैनिक जीवन में अपनी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए व्यायाम को शामिल करें।

• हीमोफिलिया के रोगियोंका वजन भी नियंत्रित होना चाहिए।

• यदि रोगियों के दांतों से खून आ रहा है, तो डॉक्टर से परामर्श करें और अपने दाँत ब्रश करने के लिए नरम (soft) टूथब्रश का उपयोग करें।

• इसके अलावा, अपने चिकित्सक से नियमित रूप से समय-समय पर जांच करवाते रहें।

हीमोफिलिया से ग्रसित व्यक्तियों को अपने मन से कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। साथ ही, ब्लड थिनिंग वाली दवाई जैसे, वार्फरिन (warfarin) और हेपरिन (heparin) जैसी दवाओं से बचना चाहिए।
शरीर में रक्त के प्रवाह को सुचारू रखने के लिए समय-समय पर अपने डॉक्टर से जाँच करें। साथ ही किसी डॉक्टर की सलाह से ही कोई इलाज करें।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

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Tuesday, September 3, 2019

What is the reason for Kidney Stone? | पथरी (किडनी स्टोन) होने के क्या कारण हैं?

पथरी गुर्दे (Kidney) की एक महत्वपूर्ण  बीमारी है जो आजकल बहोत से लोगों में आमतौर पर दिखाई देती है। पथरी की बीमारी होने पर पेट या पीठ के निचले हिस्से में असहनीय पीड़ा, पेशाब में संक्रमण होती है और अगर यह ज्यादा बढ़ जाये तो किडनी को नुकसान हो सकता है। इसलिए पथरी की बीमारी के बारे में और उसके उपायों के बारे में विस्तार से जानना जरुरी है।
पथरी क्या है? | What is Stone?
हम जिन पदार्थो का सेवन करते है उनमे कुछ मात्रा में कैल्शियम ऑक्जलेट या अन्य क्षारकाण (Crystals) होते है, जो की किडनी से पुरी तरह से फ़िल्टर नहीं हो पाते। उसके बाद वह कण एक दूसरे से मिल जाते है और कुछ दिनों में धीरे-धीरे मूत्रमार्ग में उन कणों के वजह से कठोर पदार्थ बनने लगता है, जिसे पथरी के नाम से जाना जाता है। उस कारण जब हम पेशाब करते है उसमे जलन या असहनीय पीड़ा होती है। 
किडनी में अगर १ लीटर से कम पेशाब बन रहा है तो उसमे पथरी तैयार होने की सम्भावना बढ़ जाती है। किडनी की पथरी २० से ४० साल की उम्र के लोगों में ज्यादा बनती है। महिलाओं की अपेक्षा में पुरुषों में पथरी बनाने का प्रमाण अधिक है।

किडनी स्टोन का आकार | Size of Kidney Stone 

पथरी मुख्य तौर पर मूत्रवाहिनी (ureter), मूत्राशय (urinary bladder) और किडनी (kidney) में पायी  जाती है।
पथरी विभिन्न आकर की होती है। जैसे की मूत्रमार्ग (Urethra) में जो पथरी तैयार होती है वह विभिन्न आकर की और अलग-अलग लंबाई की होती है। उसका आकार रेत के कण जितनी छोटा भी हो सकता है वही कुछ मामलों में तो वह गेंद की जितनी बड़ी भी हो सकती है। 
कुछ तरह की पथरी अंडाकार या गोल होती है तो कुछ पथरी खुरदरी होती है। जो पथरी अंडाकार या गोल होती है वह ज्यादातर बाहर से चिकनी होती है। इस प्रकार की पथरी बड़ी सरलता से पेशाब में बाहर निकल जाती है और इसमें दर्द भी कम होता है।
वही जो पथरी खुरदरी होती है उससे दर्द होने की सम्भावना बहुत ज्यादा होती है और वह सरलता से पेशाब में बाहर नहीं निकलती।

किडनी स्टोन होने के मुख्य कारण क्या है? | What are the main causes of kidney stone?


किडनी स्टोन होने के वैसे तो विभिन्न कारण है, लेकिन इनमें से कुछ मुख्य कारण हम आपको विस्तार से बताने जा रहे है जो kidney stone की सम्भावना को बढ़ाते है।

किडनी स्टोन के कारण | Causes of kidney stone

कम पानी पीना | Drink less water

आजकल ज्यादातर रोगों के मुख्य कारणों पर सोचा जाये तो उन सबका प्रथम कारण कम पानी पीना ही निकलता है । पथरी की बीमारी भी इसका अपवाद नही है। कम पानी पीना ही पथरी होने का सबसे महत्वपुर्ण कारणों में से एक कारण है। 
विशेषज्ञोंके अनुसार हर इंसान को एक दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पीना जरूरी होता है। अगर आप प्रतिदिन काम पानी पिते है तो पेशाब भी कम होती है। इसके कारण शरीर से कैल्शियम ऑक्जलेट या अन्य क्षारकाण पेशाब द्वारा शरीर से बहार नही निकल पाते है और उसके कारण ही पथरी की बीमारी हो सकती है।

आनुवंशिकता | Heredity

आनुवंशिकता भी पथरी होने का एक महत्वपूर्ण कारण है। अगर आपके परिवार में किसी को किडनी स्टोन की समस्या है, तो आनुवंशिकता के कारण परिवार के अन्य सदस्य को भी यह बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

कैल्शियम ऑक्सालेट | Calcium oxalate

पथरी के कारण में कैल्शियम ऑक्सालेट से तैयार होने वाली पथरी सबसे ज्यादा पाई जाती है। इस तरह की पथरी शरीर में कैल्शियम और ऑक्सालेट की अधिकता के कारण बनती है। कैल्शियम ऑक्सालेट, ऑक्सालेट का कैल्शियम सॉल्ट यानि एक प्रकार का नमक है। शरीर में जब ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो वह किडनी में कैल्शियम के साथ मिलकर पथरी बना देता है।
इस तरह की पथरी का निर्माण अधिक ऑक्सालेट की मात्रा वाली चीजें ज्यादा लेने से हो सकता है। जैसे की आलु की चिप्स, पालक, मुंगफली, अमरुद, भिन्डी, बादाम, शकरकंद, चुकंदर आदि चीजों में ऑक्सालेट की मात्रा अधिक होती है।

दैनिक आहार | Daily Diet

हमारे दैनिक आहार में कुछ चीजे ऐसी होती है जो किडनी स्टोन होने की सम्भावना को बढ़ाती है। जैसे की टमाटर, बैगन, लाल मास (red meat), पालक, चुकुन्दर, उच्च प्रोटीन वाले पदार्थ, बादाम, सप्लीमेंट्स, उच्च सोडियम युक्त पदार्थ, और डार्क चॉकलेट आदि।
कोई व्यक्ति अगर इस बीमारी का लक्ष्य है, तो उसे इन खाद्यपदार्थों को कम मात्रा में लेना चाहिए या तो ऐसे पदार्थो खाने पर रोक लगाने की आवश्यकता होती है।

अत्यधिक नमक का सेवन | Excessive salt intake

दैनिक आहार में अत्यधिक नमक का सेवन करना या ज्यादा नमक वाली चीजोंको ग्रहण करना किडनी स्टोन की बीमारी होने की संभावना को बढ़ावा देता है।

सिस्टीन | Cysteine

सिस्टीन मनुष्यों में एक गैर-आवश्यक सल्फर युक्त अमीनो एसिड है। सिस्टीन प्रोटीन संश्लेषण, विषहरण (detoxification) और विविध चयापचय कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
सिस्टीन से बनानेवाली पथरी का कारण अनुवांशिक होता है। लेकिन पथरी का यह प्रकार बहुत कम लोगों में है। इस प्रकार की पथरी को एक बार निकाल देने के बाद भी यह दुबारा बन जाती है।
इसके अलावा गुर्दे की पथरी बनाने के कई अन्य कारण भी है। उनमे से कुछ कारण निचे दिया गए है, 
१) मोटापा 
२) थायरॉइड 
३) डिहाइड्रेशन 
४) अधिक प्रोटीन व नमक वाला भोजन 
५) कुछ विशेष प्रकार की दवा 
६) पेशाब में अधिक मात्रा में केमिकल और एसिड होने से
७) अधिक मात्रा में जंक फुड का सेवन करने से
उपरोक्त सभी किडनी स्टोन होने के कारण है। अतः अगर आप पथरी से बचाना चाहते है तो इन कारणों पर ध्यान रखना चाहिए और इससे तुरंत निजात पाने के लिए जल्द से जल्द इलाज करना चाहिए।
(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)
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Thursday, August 29, 2019

पथरी से निजात पाने के सबसे अच्छे और गुणकारी तरीके | Effective Home Remedies for Kidney Stone

Gurde Ki Pathri Ko Thik Karne Ke Gharelu Upay 

दुनिया में पायी जाने वाली सबसे आम बीमारियोमे पथरी (stone) एक बीमारी है, जो लगभग सभी देशोमें पायी जाती है। इसकी चपेट में आप कब आ जाओगे यह आपको पता भी नहीं लगेगा। हम इस लेख में आपको पथरी से निजात पाने के सबसे अच्छे और गुणकारी तरीकों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।


आजकल हमारे खानपान के जो गलत तरीके है उनकी वजह से पथरी (stone) होना एक आम बात हो गई है। वैसे तो पथरी होने के अनेक कारन है लेकिन डॉक्‍टर्स कहते है की, हमारे खाने में कुछ ऐसे पदार्थ शामिल होते है जिनसे पथरी होने होने की सम्भावना बढ़ जाती है। जैसे की दूध और दूधजन्य पदार्थ, टमाटर, खीरा, पालक, बैंगन, चावल आदि।

Best Medicine For Kidney Stone In Hindi

ज्यादा क्षारीय पानी या हैंडपंप का पानी पीना भी पथरी होने के अन्य कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है। ऐसा पानी पीनेसे पथरी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

आप, आपके रिश्तेदार या आपके आसपास का कोई अगर इन दिनों पथरी की बीमारी से जूझ रहा है और आप सभी तमाम दवाइयां खाकर भी इससे निजात पाने में असमर्थ हो गए हैं, तो हम इस लेख में आपको ऐसे कुछ अच्छे और गुणकारी तरीके बताने वाले है जिनकी मदद से आप हमेशा के लिए पथरी की बीमारी से निजात पा सकते हैं।

पथरी को ठीक करने के घरेलू उपाय


अजवाइन का उपयोग | Use of Celery


पथरी की बीमारी पर अजवाइन (carom seeds) एक उपाय है। अगर आप पथरी की समस्या से जूझ रहे है तो कुछ मात्रा में अजवाइन खाये या तो उसे पानी के साथ निगल लें। यह उपाय अगर आप लगातार  कुछ महीने करते रहते है तो कुछ दिनोंमे आपको  में आपको पथरी से छुटकारा मिल सकता है।

इलायची का उपयोग | Use of Cardamom


अगर आप गुर्दे की पथरी (kidney stones) से पीड़ित है तो आप इससे निजात पाने के लिए इलायची का प्रायोड कर सकते है। इसके प्रयोग के लिए एक चम्‍मच इलायची पावडर ले और उसमे खरबूजे के बीज की गिरी और मिश्री के साथ एक कप पानी में उबाल लें।

इस मिश्रण को थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दे। ठंडा होने के बाद उसे छलनी से छान ले। इसे लगातार पिने से पथरी से निजात मिल सकती है।

जीरा और चीनी का पाउडर | Cumin and Sugar Powder


गुर्दे की पथरी (kidney stones) के लिए जीरा बहोत फायदेमन्द साबित होता है। अगर आप गुर्दे की पथरी (kidney stones) से जूझ रहे है तो आप जीरा और चीनी को एकसमान प्रमाण लेके एकसाथ पीस लें। उसके बाद जो पावडर तैयार हो जाएगी उसे ठंडे पानी के साथ रोजाना लें। कुछ दिन यह उपाय करने पर आपको गुर्दे की पथरी (kidney stones) से निजात मिल सकती है।

पका जामुन | Ripe Berries


पथरी के घरेलु उपायों में से पका हुआ जामुन भी काफी फायदेमंद होता है। अगर आप, आपके रिश्तेदार या आपके आसपास का कोई पथरी की बीमारी से परेशान है तो कुछ दिनों तक लगातार इसका सेवन करने से पथरी से निजात मिल सकती है।

कच्ची भिंड़ी | Raw ladyfinger


कच्ची भिंड़ी भी पथरी से निजात दिलाने में फायदेमंद है। इसके लिए आप सबसे पहले भिंडी को अच्छी तरह से साफ करके लम्बा- लम्बा काट लें। उसके बाद एक कांच का बर्तन लेके उसमे कटी हुई भिंड़ी की डालें।

उसके बाद उस कांच के बर्तन में थोड़ा पानी डालें। जिसमे वो कटी हुई भिंड़ी पूरी तरह से डूब जाए। अब उसे रात भर के लिए ढककर रख दें। अगले दिन सुबह भिंड़ी को उसी पानी में निचोड़ कर निकाल लें। अब जो पानी रहता है उस पानी को दो घंटें के भीतर पी लें। इससे गुर्दे की पथरी (kidney stones) से छुटकारा मिल सकता है।

बथुआ | Chenopodium album


बथुआ एक तरह की हरी पत्तेदार सब्जी होती है। जिसे मराठी में चाकवत कहा जाता है। इसके उपयोग से भी पथरी से निजात पाया जा सकता है।

पथरी से निजात पाने के लिए बथुआ को पानी में अच्छी तरह उबालकर छान लें। अब उस पानी में सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीएं। यह पिने से भी गुर्दे की पथरी निकल जाती है।

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Monday, August 19, 2019

Pet Ki Charbi Badhne Ke Karan In Hindi | पेट की चर्बी तेजी से बढ़ने के कारण

Belly Fat Badhne Ke Karan in Hindi


आजकल बहुत से लोग मोटापे से पीड़ित हैं। हालांकि, कुछ लोगों को मोटापा नहीं होता है, बल्कि उनका पेट बड़ा होता है। पेट का बढ़ना न केवल आपके लुक को खराब करता है बल्कि पेट की चर्बी तेजी से बढ़ने के कारण कई अन्य समस्याओं को भी निमंत्रण देता है। पेट की बढ़ी हुई चर्बी से कई अन्य गंभीर बीमारियों के बढ़ने का खतरा भी पैदा होता  है।

पेट की चर्बी तेजी से बढ़ने के ६ कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, पेट के आसपास कुछ मात्रा में fats का होना बेहद जरूरी है। क्योंकि उसकी वजह से कमर की हड्डी की रक्षा होती है। लेकिन पेट के आसपास के fats एक निश्चित सीमा से अधिक बढ़ जाए, तो कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि वे कौन सी आदतें हैं जो आपके पेट के आसपास की चर्बी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं।

Pet Ki Charbi Badhne Ke Karan In Hindi 

पाचन क्रिया कमजोर होना | Weak Digestion

यदि किसी व्यक्ति को पाचन संबंधी समस्याएं हैं, तो उस व्यक्ति के पेट पर चर्बी जमा हो जाती है। पाचन तंत्र कमजोर होने के कारण व्यक्ति को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए। थायराइड, मधुमेह, आदि।

आनुवंशिकता | Heredity

कुछ लोगों के पेट पर fats जमा होता है उसका कारण वंशानुगत यानी आनुवंशिकता होता है। अगर उनके परिवार में माता-पिता में से किसी एक को मोटापे की समस्या है, तो इससे उनके बच्चों को समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है।

जरूरत से ज्यादा खाना | Overeating

बहुत से लोग काम की कमी या तनाव के कारण जरुरत से ज्यादा खाना खा जाते हैं। अक्सर, ये व्यक्ति भूख न होने के बावजूद भी पेट भरते रहते हैं। जिससे उनके पेट पर fats बढ़ने लगती है।

हार्मोन में परिवर्तन | Changes in Hormones

पेट पर फैट्स जमा होने के अन्य कई कारणों में से ये भी एक बड़ा कारण है। कई महिलाएं चालीस से अधिक होने पर बढ़ती उम्र का सामना करती हैं। इसके पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण, मोनोपॉज है। इससे महिलाओं में estrogen के स्तर में कमी आती है। Androgen का स्तर भी बढ़ता है। जिसके कारण कमर और पेट के आसपास fats जमा हो जाती है।

तनाव में रहना | Living in Stress

यदि कोई व्यक्ति तनाव में है, तो उसके पेट के आसपास की चर्बी बढ़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप मोटापा बढ़ने लगता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण कोर्टिसोल हार्मोन है।

दिनभर सिर्फ बैठा रहना | Just Sitting All Day

पेट पर बढ़ती चर्बी के पीछे यह भी एक मुख्य कारण है। कई लोग ऐसे होते है जिनको दिनभर सिर्फ बैठे रहने का काम होता है। जिसकी वजह से कई लोग के पेट के पास fats बढ़ने लगता हैं।

सिर्फ बैठकर मोबाइल देखना, टीवी देखना भी शारीरिक गतिविधि को कम कर सकता है। जिसके कारण आप मोटापे का शिकार हो जाते है।

जब व्यक्ति तनाव में होता है तो शरीर में cortisol hormones का स्तर बढ़ जाता है। कोर्टिसोल हार्मोन शरीर में fats के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। इसके कारण, कमर और पेट के आसपास की चर्बी बढ़ने लगती है।

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Friday, August 16, 2019

6 Best And Useful Tips For Lose Weight In Hindi | वजन कम करने के ६ आसान तरीके

Simple And Effective Weight Loss Tips in Hindi


Best and useful tips for lose weight: आजकल कुछ लोगों की जीवनशैली इतनी व्यस्त होती है कि उन्हें daily workout करने के लिए समय नहीं मिलता है। इस कारण उनका वजन बढ़ता जाता है, पर इस बात की उन्हें जरा भी फ़िक्र नहीं होती। इस बढ़ते हुए वजन के कारण भविष्य में विभिन्न बीमारियों का सामना करना पड़ेगा, इस बात से भी वे चिंतित नहीं होते। ऐसे में वजन कम करने के लिए केवल लोगोंको dieting ही एकमात्र उपाय है, ऐसा लगाने लगता है।

लेकिन बिना किसी विचार या योजना के dieting करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। यह आपको शारीरिक रूप से कमजोर बना सकता है। इसलिए हम आपके लिए स्वास्थ्य संबंधी आदतों के बारे में कुछ जानकारी लेकर आए हैं। जिसके जरिए आप अपना वजन काफी तेजी से और आसानी से कम कर सकते हैं।

Tips To Lose Weight Rapidly in Hindi | तेजी से वजन कम करने के टिप्स 

नींबू का रस सेवन करें


नियमित रूप से नींबू-पानी का सेवन करें। आप सुबह या दिन के किसी भी समय नींबू-पानी का सेवन कर सकते हैं। यह शरीर की चयापचय प्रक्रियाओं को गति देता है, जिससे शरीर अधिकाधिक कैलोरी जलाता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी शरीर में फैट्स को जमा नहीं होने देता है। जिससे आपको वजन काम करने में मदद मिलती है।

सर्वोत्तम परिणामों के लिए, आप गुनगुने पानी में नींबू के रस का सेवन कर सकते हैं, इसमें कुछ मात्रा में शहद भी मिला सकते है, जिससे आपको तेजी से वजन कम करने में मदद मिलेगी।

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चीनी कम खाएं


विशेषज्ञ चीनी को एक मीठा जहर कहते हैं। 1 चम्मच चीनी में १६ कैलोरी होती है। जिस तरह से आप चीनी का सेवन करते हैं वह बहुत हानिकारक है। दूध, आटा और मावा में चीनी का उपयोग करने सेवन वजन काफी तेजी से बढ़ाता है।

इसलिए चीनी का सेवन कम करना फायदेमंद है। चाय/कॉफी, दुकान में मिलने वाले फलों के रस, शीत पेय, चॉकलेट, बिस्कुट, पेस्ट्री, केक आदि पदार्थ न खाएं या काम खाएं। चीनी के बजाय, आप गुड़, शहद का उपयोग कर सकते हैं।

खाना अच्छी तरह से चबाकर खाएं


बुजुर्ग लोगो से आपने अक्सर सुना होगा कि आपको कुछ भी खाते समय अपना खाना जल्दी-जल्दी नहीं खाना चाहिए। हमेशा खाना अच्छी तरह से चबाकर धीरे-धीरे खाना चाहिए।

इसका कारन यह है की जब आप कुछ भी जल्दी में खाते हैं, तो आप अधिक खाते है । साथ ही, मुंह में ज्यादा हवा भी जाती है। यह मोटापे का मुख्य कारण है। खाना अच्छी तरह से चबाकर आराम से खाने से भोजन को तेजी से पचाने में मदद मिलेगी और इससे आपका वजन नहीं बढ़ेगा।

कभी भूखा न रहे 


कभी भी ज्यादा समय के लिए भूखा न रहे। अगर आप लंबे समय से भूखे हैं, तो ऐसी स्थिति में आपकी कुछ चटपटा, तेज, मीठा या जंक फूड खाने की इच्छा बढ़ जाती है। यह सभी चीजे unhealthy है। जो आपके वजन बढ़ने में कारगर साबित होती है।

जब आप अधिक समय से भूखे रहने के बाद खाते है, तो आप बहुत जल्दी-जल्दी और खुछ ज्यादा ही खा लेते हैं। दोनों कारणों से आप अधिक कैलोरी का सेवन करते हैं। ऐसा मत करिये।

यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो दिन में कई बार कम से कम मात्रा में  खाएं। यानी हर तीन घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाएं। ताकि बहोत जोरों से भूख न लगे।

Diet Plan बनाएं


यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो आपको Diet Plan बनाना सख्त जरूरी होता है। एक Diet Plan बनाने के बाद उसका पालन करने से वजन कम करना आपके लिए काफी आसान हो जायेगा।

बहुत से लोग सोचते हैं कि Diet Plan बनाने का मतलब है कम खाना। लेकिन ऐसा कतई नहीं है। Diet Plan बनाने का मतलब है की आहार में पोषण आहार शामिल करना। वजन घटाने के लिए, पोषण आहार में ५० प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, २०  प्रतिशत प्रोटीन और ३० प्रतिशत फैट्स होना चाहिए।

Fat Burning Foods को Diet में शामिल करें


अपने दैनिक आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करें जिनमे कैलोरी की मात्रा बहोत काम हो। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो fat burn करने का काम करते हैं। ये fat burn करने वाले खाद्य पदार्थ आपकी metabolic (चयापचय की प्रक्रिया) को गति देते हैं। इस कारन आपको बहुत अधिक या लगातार भूख नहीं लगती।

इसलिए अपने दैनिक आहार में ओट्स, बादाम, अंडे, हरी सब्जिया, ग्रीन टी, राजमा, विभिन्न दालें, अनाज, हरी मिर्च, आदि का सेवन करें।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

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Wednesday, August 14, 2019

What Should Be The Diet Plan Before Pregnancy | गर्भधारण से पहले आहार कैसा होना चाहिए

शादी के एक साल बाद, घर के लोग और नवविवाहित जोड़े को लगता है कि उन्हें एक बच्चा होना चाहिए, और इस संबंध में प्रयास चलने लगते हैं। हालाँकि, pregnant होने में भी कई समस्याएं हैं। हम इस post में आपको गर्भधारण से पहले आहार कैसा होना चाहिए | What should be the diet plan before pregnancy के बारे में बताने जा रहे है।

गर्भवती होने में बदलती जीवनशैली, खानपान, काम के घंटे सभी के परिणाम हो सकते हैं। हालांकि, कई महिलाओंको pregnant होने के लिए कई चिकित्सा या उपचारों से गुजरना पड़ता है। यहां तक ​​कि गर्भधारण होने के बाद भी उस महिला को अनेक प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड सकता है।

सबसे पहले जानते है की गर्भधारण न होने के क्या कारन है? 

गर्भधारण न होने के कारण । Reasons For Not Getting Pregnant


१) अनियंत्रित वजन बढ़ना | Overweight and Obesity


आजकल वजन बढ़ना एक आम बात हो गई है। पति-पत्नी दोनों के वजन में होने वाली वृद्धि विचार करने पर मजबूर कर देती है। यदि पति-पत्नी दोनों अधिक वजन वाले हैं, तो गर्भवती होना या सुदृढ़ एवं स्वस्थ संतान होना मुश्किल बात होती है।

इसलिए, जब बच्चे पर विचार करते हैं, तो दोनों के लिए वजन पर नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।

२) हार्मोन का असंतुलन | Hormonal Imbalance


Hormonal Imbalance यह भी आजकल पति-पत्नी दोनों में भी पाया जाता है। हालांकि, गर्भावस्था के लिए एक माँ के hormones आवश्यक होते हैं। गर्भावस्था, प्रसव और माँ का दूध माँ के संतुलित hormones पर निर्भर करता है।

यदि किसी महिला को थायरॉयड है, तो अक्सर गर्भवती होना मुश्किल होता है।

३) खून की कमी | Anaemia


महिलाओं में रक्त के कमी होने की सबसे आम बीमारी है। इसलिए, गर्भधारण होने के बाद माताओं और शिशुओं दोनों को यह बीमारी हो सकती है। इसी वजह से अक्सर कम वजन वाले और अपर्याप्त बच्चे पैदा होते हैं।

उपरोक्त सभी कारकों में यदि नियोजनबद्ध और ठीक तरह से आहार लिया जाये, तो महिलाओंमे pregnancy के दौरान अच्छे बदलाव देखे जा सकते हैं। इसीलिए गर्भधारण से पहले सिर्फ दवाएं लेनेके बजाय अच्छी diet planning करना भी बहोत जरुरी होता है।

गर्भावस्था से पहले आहार कैसा होना चाहिए | What Should Be The Diet Before Pregnancy 


१) पौष्टिक आहार की योजना बनाएं | Plan Nutritional Diet


आहार में सबसे अधिकाधिक पोषण मूल्य किस तरह से प्राप्त कर सकते है, उस तरह की आहार की योजना बनाये |  आप अपने दैनिक आहार में कम मात्रा में मिश्रित दाल, मिश्रित अनाज, अंकुरित अनाज, खिचड़ी, पत्तेदार सब्जियों का उपयोग कर सकते हैं। जिससे आपको ज्यादा से ज्यादा protein मिल सकेगा।

२) आयरन युक्त आहार | Iron Rich Diet


आयरन स्वस्थ pregnancy के लिये एक बहोत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसलिए भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, और साथ में अनार, लीची, अंजीर जैसे फलोंका का रोज सेवन करें। इसके साथी शरीर को आयरन सोखने में मदद मिलने के लिए vitamin-c का प्रयोग करें।

३) कैल्शियम की मात्रा अधिक लें | Take More Calcium


नवजात शिशु के दातो और हड्डियों के विकास के लिए आहार में कैल्शियम की मात्रा अधिक लें। यह न केवल आपको कमर दर्द और पीठ से निजात दिलाएगा बल्कि breast feeding के लिए भी तैयार करेगा। कैल्शियम की मात्रा बढ़ने के लिए आहार में दूध एवं दूध की बनी चीजें, हरी-पत्तेदार सब्जियां (खास तौर से पालक), फल, मूंगफली आदि को डाइट में शामिल करें।

४) रोज व्यायाम करे | Do Exercise Daily


Pregnancy में शरीर को स्वस्थ रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए योगा, पैदल चलना या अन्य हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए। उसीके साथ मन को शांत और एकाग्र रखने के लिए आप मेडिटेशन का भी कर सकती हैं। यह आपको अनावश्यक तनाव से निजाद दिलाने में मदद करेगा।

५) कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन ले | Take Carbohydrate Rich Food


Pregnancy में शरीर को उर्जा और fibers की आवश्यकता होती है। इसलिए उनकी पूर्ति हेतु कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन को प्राथमिकता दें। अपने भोजन में सलाद, फल, साबुत अनाज जैसी चीजों को शामिल करें। इसके अलावा इस दौरान छिलके वाली मूंग की दाल खाना भी काफी फायदेमंद होता है।

६) भरपूर पानी पिए | Drink Plenty of Water


इन सभी सबसे जरुरी बात यह है की दिनभर में कम से कम 6 से 8 ग्लास पानी जरूर पिएं। लेकिन उसीके साथ यह ध्यान भी दे की एक ही समय अधिक पानी न पिए। पानी शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करने में मदद करता है और साथ ही यह शरीर में आवश्यक नमी भी बनाये रखता है।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

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