Friday, October 4, 2019

Face waxing tips, Side effect, After waxing tips in Hindi

चेहरे की वैक्सिंग करते समय ध्यान रखने योग्य 6 बातें


चेहरे पर अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के लिए लड़कियां चेहरे पर ब्लीच या वैक्स करती हैं। उसीके साथ कई सौंदर्य उत्पादों और उपचारों का भी उपयोग करती है। उनमें से, कई महिलाएं चेहरे पर के अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के लिए वैक्सिंग का सहारा लेती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं? वैक्सिंग करते समय कई बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। अन्यथा आपको फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं कि face waxing करने से पहले आपको किन बातों पर ध्यान देना चाहिए / 6 things to get consider while face waxing

Read More: https://ghareluremedies.com/6-useful-things-get-consider-while-waxing-face-hindi/

Face Waxing Tips in Hindi | फेस वैक्सिंग टिप्स


खुद face wax न करें 

अक्सर, लड़कियों सोचती है कि face waxing करना बहुत आसान है। इसलिए वे घर पर ही face waxing शुरू कर देते हैं। लेकिन, कभी भी घर पर ऐसा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आप किसी की मदद से face wax strips का उपयोग कर सकते हैं।

स्वच्छता का ध्यान रखें | Take care of cleanliness

Waxing से पहले चेहरे को अच्छी तरह से धो ले। और बाद में अच्छे से साफ करले। इसके लिए आप facewash का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। ध्यान रहे की अगर चेहरा साफ है तभी वैक्सिंग के बाद चेहरे पर अनचाहे बाल हटाने में मदद मिलेगी।

Scrubbing और bleaching के दौरान सावधान रहें

वैक्सिंग के 12 घंटे पहले या बाद में त्वचा पर ब्लीच, स्क्रबिंग या कोई फेसपैक न लगाएं। यह त्वचा को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा वैक्सिंग के बाद फेसवॉश या साबुन का इस्तेमाल न करें।

Also Read: Best 8 Health Tips For Women | महिलाओं के लिए बेस्ट हेल्थ टिप्स

त्वचा के प्रकार पर ध्यान दें | Pay attention to skin type

वैक्सिंग से पहले, अपनी त्वचा के प्रकार की जाँच अवश्य कर लें। यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो किसी त्वचा विशेषज्ञ से जरूर परामर्श करें। इसलिए आपको waxing के बाद संक्रमण नहीं होगा।

चेहरे के लिए उपयुक्त वैक्स चुनें | Choose the appropriate face wax 

चेहरे पर इस्तेमाल किया जाने वाला वैक्स अन्य वैक्स से अलग होता है। इसलिए जब चेहरे पर वैक्सिंग करें तो सही वैक्स का चयन करें। अन्यथा, आपको skin rashes, त्वचा पर चकत्ते, जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए आप एलोवेरा, हनी वैक्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

चेहरे के बालों की वृद्धि पर ध्यान दें | Focus on facial hair growth

चेहरे के बालों की growth कम होने पर वैक्स बिल्कुल न करें। अगर बालों की growth ज्यादा है तो वैक्सिंग फायदेमंद है। छोटे बाल काटने के लिए आप threading का उपयोग कर सकती हैं।

After waxing tips in Hindi | वैक्सिंग के बाद आपको क्या ध्यान रखना चाहिए


• वैक्सिंग के बाद, यदि skin लाल हो जाती है या उसपर rashes हो जाते हैं, तो उस पर बर्फ लगाएं या बर्फ के टुकड़े से मालिश करें।
• यदि चहरे पर अधिक जलन हो रही है, तो मुल्तानी मिट्टी, एलोवेरा जेल या ककड़ी का रस लगाए।
• वैक्सिंग के बाद वैक्सिंग लोशन लगाएं। जरूरत पड़ने पर आप face serum भी लगा सकती हैं।
• Waxing के बाद कोई भी सुगंधित क्रीम बिल्कुल न लगाएं। यह जलन पैदा कर सकता है।
• Waxing के बाद 24 घंटों के तक धुप में बिल्कुल न जाये।
• तकरीबन 24 घंटे के लिए स्विमिंग पूल में भी न तैरें।
• सिंथेटिक कपड़े से चेहरे को साफ न करे। इसके लिए napkin का उपयोग करें।
• चेहरे को साफ करने के लिए साबुन के बजाय फेस वॉश का इस्तेमाल करें।
• Waxing के बाद गैस के पास काम न करें। क्योकि waxing के बाद skin pores खुल जाते हैं। इस तरह यह skin को नुकसान पहुंचा सकता है।

Face waxing side effects in Hindi | फेस वैक्सिंग के साइड इफेक्ट्स


चेहरे की वैक्सिंग भी हानिकारक हो सकती है क्योंकि चेहरे की त्वचा मुलायम होती है। उसी तरह लगातार वैक्सिंग करने से समय से पहले झुर्रियां पड़ सकती हैं।

इसके अलावा अक्सर वैक्सिंग से hair follicles को नुकसान होता है। जो इंफेक्शन और सूजन जैसी समस्याओं का कारण बनता है। इससे निशान भी पड़ सकते हैं। इसलिए वैक्सिंग से पहले सावधान रहना जरूरी है।

Thursday, October 3, 2019

Best Health Tips For Women in Hindi

Best Health Tips For Women | महिलाओं के लिए बेस्ट हेल्थ टिप्स 


Best Health Tips For Women in Hindi - आजकल की भागदौड़ वाली जिन्दगीमें महिलाये अपने काम और परिवार के बीचमे तालमेल बिठाते वक्त खुद की सेहत को अनदेखा करती है। जिसका सीधा असर महिलाओंके सेहतपे हो रहा है। नतीजन उनमे बीमारियाँ बढ़ रही हैं। इसीलिए इस लेख में हम आपको स्वस्थ रहने के लिए सबसे बेस्ट हेल्थ टिप्स बताने जा रहे है....

Top 8 Health Tips For Women in Hindi | महिलाओं के लिए टॉप हेल्थ टिप्स

खाने पिनेपे ध्यान रखे | Pay Attention on Food & Drink  

आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी और बढ़ते हुए काम के कारण महिलाएं अक्सर अपने खाने पिने पर ध्यान नहीं दे पाती। जिसके कारण वे बीमारी का शिकार हो जाती है।
इसलिए अगर आपको स्वस्थ रहना है और आपको अपने परिवार का भी ख्याल रखना है तो सबसे पहले खुद के हेल्थ के बारे में ध्यान रखना होंगा। और खुदकी health अच्छी रहे इसलिए महिलाये अपने खाने पिने पे ध्यान दे।

पर्याप्त नींद ले | Get Enough Sleep 

अगर आप अच्छा स्वास्थ चाहती है तो महिलाओंको पर्याप्त नींद लेना बहोत जरुरी है। यदि नींद अच्छी हुई तो काम में आपका मन लगा रहेगा। लेकिन अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेती है तो आपको थकावट महसूस हो सकती है जिसका सीधा असर आपके काम पर हो सकता है, इसलिए पर्याप्त नींद ले। साथ ही अच्छी नींद हुई तो आप ह्रदय संबंधी तथा मानसिक बीमारियों का शिकार होने से भी बच सकती है।

For More Health Related Articles, Read: https://ghareluremedies.com

तनाव को खत्म करे | Destroy Your Stress 

आजकल ज्यादातर महिलाओ में दिखाई देनेवाली यह सबसे बढ़ी और अस्वस्थ कर देने वाली समस्या है। महिलाये अक्सर काम में busy रहती है।.उनके पास करने के लिए बहोत सारे काम होते है। जिनको करते करते वे ना ही सिर्फ शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से काफी थक जाती है। जिसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ पर पड़ता है और वे तनाव की शिकार हो जाती है।

तनाव से health related अन्य बीमारिया भी हो सकती है जिनमे ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट अटैक जैसी भयंकर बीमारियोंका सामना करना पड सकता है। इससे बचने के लिये ज्यादा तनाव में ना रहे और खुद को हमेशा तनाव से दूर रखने की कोशिश करे।

जनन क्षमता के बारे में विचार करे | Consider Fertility

वैसे तो ३० से ४० उम्र में महिलाओंको गर्भवती होने की कोई समस्या नही होती है, लेकिन अपने उम्र के 32 वे साल के बाद से ही वे अपनी जनन क्षमता को खोना शुरू कर देती है। इसीलिये इस उम्र में यदि आप बच्चे की चाह रखती है तो अच्छे डॉक्टर की सलाह ले।

पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम ले | Take a sufficient amount of calcium

कैल्शियम एक यैसा घटक है जिसकी खाने में मात्रा सही न हो तो आपको न केवल किडनी से जुडी कई बीमारिया, जैसे की किडनी स्टोन जैसे खतरनाक बीमारी का सामना करना पड़ सकता है बल्कि इसके साथ ही आपको हार्ट से जुडी बीमारिया भी हो सकती है। उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है वैसे-वैसे शरीर में कैल्शियम की जरुरत भी बढ़ती है।

यदि आप 40 से कम है, तो हर दिन आपको 1000 mg कैल्शियम की जरुरत होगी, और यदि आप की उम्र 40 से अधिक है तो आपको 1200 mg कैल्शियम लगेगा। इसलिए बढ़ती उम्र के साथ पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम ले। जो की आपको बादाम और दुध से मिल सकता है।

स्वस्थ संभोग पर रखे ध्यान | Do Healthy Sex

अगर आप तनाव को हमेशा खुद से दूर रखना चाहती है तो आप स्वस्थ संभोग पर ध्यान दे ये न केवल आपके तनाव को कम करेगा बल्कि दीर्घकालीन बीमारियों का खतरा भी कम करेगा। इसलिए हमेशा पुरे समर्पण के साथ इसका आनंद ले।

आनुवांशिक इतिहास की जांच करे | Check genetic history

लोगों में आजकल हार्ट, डायबिटीज, कैंसर जैसी कई बीमारिया है जो की आनुवंशिक कारणों से होती है। इसीलिये डॉक्टर से अपने आनुवांशिक इतिहास के बारे में जांच करे और अगर इससे जुडी कोई समस्या है तो जल्द से जल्द डॉक्टर की सलाहनुसार उसका इलाज करे।

हमेशा व्यायाम करे | Always exercise

आजकल की तनाव भरी लाइफ में महिलाओ को exercise करने की बहोत जरुरत है। यदि आप बीमारियों से बचना चाहती है तो दिन में कुछ समय exercise के लिए जरूर निकाले। इससे न केवल ह्रदय विकार, शुगर जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि यह आपके तनाव को दूर रखने में भी आपकी सहायता करता है। व्यायाम करने से आपका स्वास्थ हमेशा अच्छा रहेगा। इसलिए रोजाना exercise करे।

उपरोक्त उपायों से आपको स्वस्थ रहने में काफी मदद मिल सकती है। क्योकी पुरे घर की जिम्मेदारी महिलाओंपर होती है। महिलाये स्वस्थ रहेंगी तभी घर अपने घर को स्वस्थ रख पाएंगी। इसीलिए महिलाओंका स्वस्थ रहना बहोत जरुरी है।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

अगर आपको यह post पसंद आये तो comment जरूर करे और आपकी प्रसन्नता दर्शाने हेतु कृपया इसे Facebook और Twitter पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

Tuesday, October 1, 2019

Top 5 most shocking myths and facts about erectile dysfunction in Hindi

Erectile Dysfunction Myths And Facts in Hindi | इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से संबंधित गलतफहमियां


Erectile dysfunction एक ऐसी समस्या है जिसमें पुरुष intercourse के दौरान erection नहीं रख पाते हैं। Sex life के साथ, यह कई लोगों के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है। लेकिन इस समस्या के बारे में कुछ गलत धारणाएं हैं। Erectile dysfunction myths को लोग सच मानते हैं। और इसीलिए वे इसका इलाज करने से भी डरते हैं। आज हम आपको इस लेख में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के बारे में जो मिथक और सच्चाई है उनके बारे विस्तार से बताने जा रहे है...

What is erectile dysfunction in hindi - इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या स्तंभन दोष क्या है?

इरेक्टाइल डिसफंक्शन या स्‍तंभन दोष यह एक लैंगिक बीमारी है। इस बीमारी में पुरुष sex के दौरान लिंग मे कठोरता बनाये रखने में असमर्थ महसूस करता है। यह बीमारी युवा वर्ग से लेके सभी उम्र के पुरुषों में होती है। इसका कारण आमतौर पर तनाव, आपसी रिश्ते में कड़वाहट, sex के दौरान प्रदर्शन की चिंता, depression और चिकित्‍सा जटिलताएं होती हैं।

Read More: https://ghareluremedies.com/relationship/sex-diseases/

आइये जानते है इरेक्टाइल डिसफंक्शन से जुड़े कुछ मिथ और तथ्य....

Myths and Facts about Erectile Dysfunction in Hindi


मिथ : इरेक्टाइल डिसफंक्शन समस्या केवल बुजुर्गों को होती है।

तथ्य: ऐसा बिलकुल नहीं है। यह सच है की बढ़ती उम्र के साथ इरेक्टाइल डिसफंक्शन या स्तंभन समस्याएं होती हैं। लेकिन ऐसा हरगिज नहीं है कि ये समस्या केवल उम्र बढ़ने पर या बुजुर्ग पुरुषोंमें होती है। युवा वर्ग भी इसका शिकार होता है। और अक्सर ऐसा होता है कि कई पुरुष बड़े होने पर भी अपनी sex life को एन्जॉय करते रहते हैं।

​मिथ : इरेक्टाइल डिसफंक्शनसे सेक्स लाइफ खत्म होती है।

तथ्य: यह एक बड़ी गलत धारणा है। यदि किसी व्यक्ति को इरेक्टाइल डिसफंक्शन या स्तंभन दोष है, तो वह डॉक्टर की सलाह पर कुछ दवा ले सकता है। इससे आपको इस समस्या को दूर करने में मदद मिल सकती है। कुछ उपचारों से भी erectile dysfunction की समस्या को दूर किया जा सकता है।

मिथ : तंग अंडरवियर से इरेक्टाइल डिसफंक्शन होता है।

तथ्य: एक धारणा यह भी है कि टाइट अंडरवियर पहनने वाले पुरुषों को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन यह सच नहीं है। बहुत तंग अंडरवियर पहनने से प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

मिथ : केवल पुरुषों के प्राइवेट पार्ट में समस्या।

तथ्य: ऐसा बिलकुल नहीं है। कुछ लोग एक ही गलती करते हैं। लेकिन वास्तव में, इरेक्शन इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि पुरुष जननांगों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी कुछ समस्या हो सकती है। इसलिए, समय बर्बाद किए बिना, आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

मिथ: इरेक्टाइल डिसफंक्शन का इलाज नहीं कर सकते।

तथ्य: इरेक्टाइल डिसफंक्शन का इलाज कई तरीको से किया जा सकता है। इसके इलाज के लिए कई तहर की प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं। इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज के लिए अलोपॅथी, होमियोपैथी और आयुर्वेद में कारगर उपाय दिए गए है। इन उपायों में  में इंजेक्शन, मूत्रमार्ग या लिंग के ऊतकों में रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करना, वैक्‍यूम पंप द्वारा लिंग को रक्त देना आदि शमिल है।

मिथ : सिगरेट पीने से प्राइवेट पार्ट को कोई हानि नहीं होती।

तथ्य: यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। आपकी विभिन्न आदतों के साथ, धूम्रपान आपके private part पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। सिगरेट धूम्रपान मेल प्राइवेट पार्ट की रक्त वाहिका (नसों) को नष्ट कर देता है। इसके कारण, उस क्षेत्र में रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं होता है और इससे लिंग में इरेक्शन नहीं होता है।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

अगर आपको यह post पसंद आये तो comment जरूर करे और आपकी प्रसन्नता दर्शाने हेतु कृपया इसे Facebook और Twitter पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

Friday, September 27, 2019

When Do Women And Men Feel Most Sexually Active In Hindi

सर्वेक्षण से पता चलता है कि महिला और पुरुष अलग-अलग समय पर सेक्शुअली अ‍ॅक्टिव फील करते हैं, जिससे कि शारीरिक संपर्क की उनकी इच्छा अलग-अलग समय पर जागती है।

इसलिए यदि आपको लगता है कि आपका साथी कम शारीरिक सम्बन्ध बनाता है, तो यह उसके अलग समय पर सेक्शुअली अ‍ॅक्टिव फील करने के कारण हो सकता है। आज हम इस लेख में इस बारे में कुछ रोचक और अद्भुत बातें बताने जा रहे है, तो आइये इस बारे में विस्तार से जानते है...

Read More About Health: https://ghareluremedies.com/

सबसे ज्यादा किस समय पुरुष और महिलाएं उत्तेजित होती है? | What time do men and women get excited the most?


रिपोर्ट के अनुसार, एक कंपनी द्वारा २३०० वयस्कों के साथ एक सर्वेक्षण किया गया था। उनमेसे लगभग ७० प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उनकी सेक्स ड्राइव (sex drive) उनके और उनके साथी से मेल नहीं खाती। क्योंकि दोनों अलग-अलग समय पर उत्तेजित होते हैं। यह मुख्य रूप से महिलाओं और पुरुषों के विभिन्न हार्मोन चक्र (hormone cycle) के कारण होता है।

पुरुषों का कहना है कि वे अपने दिन की शुरुआत सुबह ६ से ९ बजे के बीच शारीरिक संबंध बनाकर करना चाहते हैं। उनमे रात में ११ से २ बजे के बीच यौन संबंध बनाने की इच्छा जागृत होती है। कुल मिलाकर देखा जाये तो, पुरुष सुबह ७ से ८ बजे के दौरान सबसे अधिक उत्तेजित होते हैं। वही महिलाएं रात को ११.३० बजे ज्यादा उत्तेजित होती है।

पुरुषों और महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कब ज्यादा होता हैं? | When are testosterone levels higher in men and women?


सुबह में पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अधिक होता है। जबकि महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। लेकिन उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर उनके मासिक धर्म चक्र (menstrual cycle) पर भी निर्भर करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जहां महिलाएं लचीली (flexible) होती हैं, वहीं पुरुषों की इच्छा सीधे समय पर आधारित होती है। महिलाओं की सेक्स ड्राइव समय से परे कई चीजों से प्रभावित हुई है। लेकिन अलग-अलग शेड्यूल से सेक्स लाइफ खत्म नहीं होनी चाहिए।

महिलाएं सबसे अधिक यौन सक्रियता कब महसूस करती है? | When do women feel most sexually active?


सर्वेक्षण के अनुसार, महिलाओं की कामेच्छा अधिक जटिल, अधिक मनोवैज्ञानिक है। इसका उनके पार्टनर से कोई लेना-देना नहीं है। यदि वे अच्छा आत्मसम्मान महसूस करते हैं और उत्तेजित होते हैं, तब वे निस्संदेह शारीरिक संबंधों के लिए आगे बढ़ेंगी। उस समय, वे संभोग का अनुभव करने की अधिक संभावना रखते हैं, चाहे कोई भी समय हो।

आप कितनी बार सेक्स करते हैं या नहीं करते हैं, इसका गिल्ट (guilt) छोड़कर भी एक अच्छा लैंगिक जीवन (sex life) हासिल कीया जा सकती है। अक्सर महिलावोंकी तबतक शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा नहीं होती, जब तक कि पार्टनर के साथ फोरप्ले शुरू न हो जाए। जो ऐसा कहता है, उसके बारे में मत सोचो। वही करें जो आपका मन कहता है।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

अगर आपको यह post पसंद आये तो comment जरूर करे और आपकी प्रसन्नता दर्शाने हेतु कृपया इसे Facebook और Twitter पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

Thursday, September 26, 2019

Hemophilia Disease Symptoms, Causes, Treatment, and Types in Hindi

अगर आपको कभी थोड़ी चोट लगाती है और उससे खून बहता है, लेकिन कई उपायों के बाद भी खून नहीं रुकता है? तब आपको हीमोफिलिया (Hemophilia) हो सकता है। हीमोफिलिया (Hemophilia) एक आनुवांशिक बीमारी है। इस बीमारी में चोट लगाने के कुछ मिनटों के बाद भी रक्त बहता रहता है। फिर चाहे कितने भी उपाय करें, खून नहीं रुकता है।

अगर हीमोफिलिया (Hemophilia) से पीड़ित व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना होती है या उसे कोई गंभीर बीमारी होती है, तो उसे अपनी जान भी गावनि पड़ सकती है। क्योंकि इस बीमारी में खून रुकता नहीं है, और बहुत अधिक खून बह जाता है। जिसके कारण शरीर में खून  की कमी के कारण उस व्यक्ति के जान को खतरा हो सकता है। इस लेख में आज हम आपको इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

हीमोफिलिया क्या है? | What is Hemophilia?

हीमोफिलिया (Hemophilia) एक विरासत में मिली हुई आनुवांशिक बीमारी है जो रक्त के थक्के (Blood clots) बनाने के लिए शरीर की क्षमता को बाधित करता है, जो की रक्तस्राव को रोकने के लिए एक आवश्यक प्रक्रिया होती है। इससे लोगों को चोट लगने के बाद लंबे समय तक रक्तस्राव होता है और जोड़ों या मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है।

थक्के के 13 प्रकार के कारक (clotting factors) होते हैं, और ये रक्त के थक्के (blood clot) की मदद करने के लिए प्लेटलेट्स (platelets) के साथ काम करते हैं। प्लेटलेट्स छोटी रक्त कोशिकाएं होती हैं जो आपके अस्थि मज्जा (bone marrow) में बनती हैं।

हीमोफिलिया के कारण | Causes of Hemophilia


विशेषज्ञ के अनुसार, हीमोफिलिया (Hemophilia) का सबसे आम कारण रक्त में प्रोटीन की कमी है। जिसके कारण ब्लड क्लॉटिंग फॅक्टरपर परिणाम दिखाई देते है। शरीर में जख्म होने के बाद खून रुकने के लिए blood clotting factor मदद करता है।

Read More: https://ghareluremedies.com

हीमोफिलिया के प्रकार | What are the Types of Hemophilia?


हीमोफिलियाके तीन प्रकार के होते हैं ... हीमोफिलिया ए, बी और सी।

हीमोफिलिया ए | Hemophilia A


हीमोफिलिया ए सबसे सामान्य प्रकार का हीमोफिलिया है, और यह ब्लड कारक VIII में कमी के कारण होता है। हीमोफिलिया वाले 10 में से आठ लोगों में हीमोफिलिया ए होता है।

हीमोफिलिया बी | Hemophilia B


हीमोफिलिया बी, जिसे क्रिसमस रोग भी कहा जाता है, जो कारक IX की कमी के कारण होता है।

हीमोफिलिया सी | Hemophilia C


हीमोफिलिया सी इस बीमारी का सबसे हल्का प्रकार है जो कारक XI की कमी के कारण होता है। इस प्रकार के हीमोफिलिया वाले लोग अक्सर सहज रक्तस्राव का अनुभव नहीं करते हैं। आघात या सर्जरी के बाद आमतौर पर रक्तस्राव होता है।

बेहद दुर्लभ मामलों में, हीमोफिलिया जन्म के बाद विकसित हो सकता है। इसे "अधिग्रहित हीमोफिलिया" (acquired hemophilia) कहा जाता है। यह उन लोगों में होता है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) एंटीबॉडीज बनाती है जो कारक VIII या IX पर हमला करते हैं।

हीमोफिलिया के लक्षण क्या हैं? | What Are the Symptoms of Hemophilia?


आपके लक्षणों की सीमा आपके कारक की कमी की गंभीरता पर निर्भर करती है। आघात के मामले में मामूली कमी वाले लोगों को खून बह सकता है। एक गंभीर कमी वाले लोग बिना किसी कारण के खून बह सकता है।

सहज रक्तस्राव निम्नलिखित कारणों से हो सकता है:

• कटने या गहरी चोट से
• सर्जरी या दंत चिकित्सा के बाद अस्पष्टीकृत और अत्यधिक रक्तस्राव
• कई बड़े या गहरे घाव
• मूत्र या मल में खून
• टीकाकरण के बाद असामान्य रक्तस्राव
• आपके जोड़ों में दर्द, सूजन या जकड़न

हीमोफीलिया पर उपचार क्या है? | what is the treatment for hemophilia?



हीमोफिलिया के लिए प्राथमिक उपचार फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी (factor replacement therapy) है। जिसमें क्लॉटिंग फैक्टर (clotting factor) को replace करने का काम किया जाता है। इस थेरेपी में, रक्त प्लाज्मा (blood plasma) को एकत्र किया जाता है और उसे शुद्ध किया जाता है।

हीमोफिलिया ए का इलाज prescription hormone के साथ कर सकता है। इस हार्मोन को डेस्मोप्रेसिन (desmopressin) कहा जाता है। जिसे डॉक्टर इंजेक्शन के रूप में आपकी नस में दे सकते हैं। यह दवा रक्त के थक्के (blood clots) बनने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार कारकों को उत्तेजित करके काम करती है।

हीमोफिलिया से पीड़ित लोगों को इसका ध्यान रखना चाहिए | haemophilia patients should take care of this

• हीमोफिलिया के रोगियों को अक्सर सलाह दी जाती है कि वे अपने दैनिक जीवन में अपनी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए व्यायाम को शामिल करें।

• हीमोफिलिया के रोगियोंका वजन भी नियंत्रित होना चाहिए।

• यदि रोगियों के दांतों से खून आ रहा है, तो डॉक्टर से परामर्श करें और अपने दाँत ब्रश करने के लिए नरम (soft) टूथब्रश का उपयोग करें।

• इसके अलावा, अपने चिकित्सक से नियमित रूप से समय-समय पर जांच करवाते रहें।

हीमोफिलिया से ग्रसित व्यक्तियों को अपने मन से कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। साथ ही, ब्लड थिनिंग वाली दवाई जैसे, वार्फरिन (warfarin) और हेपरिन (heparin) जैसी दवाओं से बचना चाहिए।
शरीर में रक्त के प्रवाह को सुचारू रखने के लिए समय-समय पर अपने डॉक्टर से जाँच करें। साथ ही किसी डॉक्टर की सलाह से ही कोई इलाज करें।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

अगर आपको यह post पसंद आये तो comment जरूर करे और आपकी प्रसन्नता दर्शाने हेतु कृपया इसे Facebook और Twitter पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

Tuesday, September 3, 2019

What is the reason for Kidney Stone? | पथरी (किडनी स्टोन) होने के क्या कारण हैं?

पथरी गुर्दे (Kidney) की एक महत्वपूर्ण  बीमारी है जो आजकल बहोत से लोगों में आमतौर पर दिखाई देती है। पथरी की बीमारी होने पर पेट या पीठ के निचले हिस्से में असहनीय पीड़ा, पेशाब में संक्रमण होती है और अगर यह ज्यादा बढ़ जाये तो किडनी को नुकसान हो सकता है। इसलिए पथरी की बीमारी के बारे में और उसके उपायों के बारे में विस्तार से जानना जरुरी है।
पथरी क्या है? | What is Stone?
हम जिन पदार्थो का सेवन करते है उनमे कुछ मात्रा में कैल्शियम ऑक्जलेट या अन्य क्षारकाण (Crystals) होते है, जो की किडनी से पुरी तरह से फ़िल्टर नहीं हो पाते। उसके बाद वह कण एक दूसरे से मिल जाते है और कुछ दिनों में धीरे-धीरे मूत्रमार्ग में उन कणों के वजह से कठोर पदार्थ बनने लगता है, जिसे पथरी के नाम से जाना जाता है। उस कारण जब हम पेशाब करते है उसमे जलन या असहनीय पीड़ा होती है। 
किडनी में अगर १ लीटर से कम पेशाब बन रहा है तो उसमे पथरी तैयार होने की सम्भावना बढ़ जाती है। किडनी की पथरी २० से ४० साल की उम्र के लोगों में ज्यादा बनती है। महिलाओं की अपेक्षा में पुरुषों में पथरी बनाने का प्रमाण अधिक है।

किडनी स्टोन का आकार | Size of Kidney Stone 

पथरी मुख्य तौर पर मूत्रवाहिनी (ureter), मूत्राशय (urinary bladder) और किडनी (kidney) में पायी  जाती है।
पथरी विभिन्न आकर की होती है। जैसे की मूत्रमार्ग (Urethra) में जो पथरी तैयार होती है वह विभिन्न आकर की और अलग-अलग लंबाई की होती है। उसका आकार रेत के कण जितनी छोटा भी हो सकता है वही कुछ मामलों में तो वह गेंद की जितनी बड़ी भी हो सकती है। 
कुछ तरह की पथरी अंडाकार या गोल होती है तो कुछ पथरी खुरदरी होती है। जो पथरी अंडाकार या गोल होती है वह ज्यादातर बाहर से चिकनी होती है। इस प्रकार की पथरी बड़ी सरलता से पेशाब में बाहर निकल जाती है और इसमें दर्द भी कम होता है।
वही जो पथरी खुरदरी होती है उससे दर्द होने की सम्भावना बहुत ज्यादा होती है और वह सरलता से पेशाब में बाहर नहीं निकलती।

किडनी स्टोन होने के मुख्य कारण क्या है? | What are the main causes of kidney stone?


किडनी स्टोन होने के वैसे तो विभिन्न कारण है, लेकिन इनमें से कुछ मुख्य कारण हम आपको विस्तार से बताने जा रहे है जो kidney stone की सम्भावना को बढ़ाते है।

किडनी स्टोन के कारण | Causes of kidney stone

कम पानी पीना | Drink less water

आजकल ज्यादातर रोगों के मुख्य कारणों पर सोचा जाये तो उन सबका प्रथम कारण कम पानी पीना ही निकलता है । पथरी की बीमारी भी इसका अपवाद नही है। कम पानी पीना ही पथरी होने का सबसे महत्वपुर्ण कारणों में से एक कारण है। 
विशेषज्ञोंके अनुसार हर इंसान को एक दिन में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पीना जरूरी होता है। अगर आप प्रतिदिन काम पानी पिते है तो पेशाब भी कम होती है। इसके कारण शरीर से कैल्शियम ऑक्जलेट या अन्य क्षारकाण पेशाब द्वारा शरीर से बहार नही निकल पाते है और उसके कारण ही पथरी की बीमारी हो सकती है।

आनुवंशिकता | Heredity

आनुवंशिकता भी पथरी होने का एक महत्वपूर्ण कारण है। अगर आपके परिवार में किसी को किडनी स्टोन की समस्या है, तो आनुवंशिकता के कारण परिवार के अन्य सदस्य को भी यह बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

कैल्शियम ऑक्सालेट | Calcium oxalate

पथरी के कारण में कैल्शियम ऑक्सालेट से तैयार होने वाली पथरी सबसे ज्यादा पाई जाती है। इस तरह की पथरी शरीर में कैल्शियम और ऑक्सालेट की अधिकता के कारण बनती है। कैल्शियम ऑक्सालेट, ऑक्सालेट का कैल्शियम सॉल्ट यानि एक प्रकार का नमक है। शरीर में जब ऑक्सालेट की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो वह किडनी में कैल्शियम के साथ मिलकर पथरी बना देता है।
इस तरह की पथरी का निर्माण अधिक ऑक्सालेट की मात्रा वाली चीजें ज्यादा लेने से हो सकता है। जैसे की आलु की चिप्स, पालक, मुंगफली, अमरुद, भिन्डी, बादाम, शकरकंद, चुकंदर आदि चीजों में ऑक्सालेट की मात्रा अधिक होती है।

दैनिक आहार | Daily Diet

हमारे दैनिक आहार में कुछ चीजे ऐसी होती है जो किडनी स्टोन होने की सम्भावना को बढ़ाती है। जैसे की टमाटर, बैगन, लाल मास (red meat), पालक, चुकुन्दर, उच्च प्रोटीन वाले पदार्थ, बादाम, सप्लीमेंट्स, उच्च सोडियम युक्त पदार्थ, और डार्क चॉकलेट आदि।
कोई व्यक्ति अगर इस बीमारी का लक्ष्य है, तो उसे इन खाद्यपदार्थों को कम मात्रा में लेना चाहिए या तो ऐसे पदार्थो खाने पर रोक लगाने की आवश्यकता होती है।

अत्यधिक नमक का सेवन | Excessive salt intake

दैनिक आहार में अत्यधिक नमक का सेवन करना या ज्यादा नमक वाली चीजोंको ग्रहण करना किडनी स्टोन की बीमारी होने की संभावना को बढ़ावा देता है।

सिस्टीन | Cysteine

सिस्टीन मनुष्यों में एक गैर-आवश्यक सल्फर युक्त अमीनो एसिड है। सिस्टीन प्रोटीन संश्लेषण, विषहरण (detoxification) और विविध चयापचय कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
सिस्टीन से बनानेवाली पथरी का कारण अनुवांशिक होता है। लेकिन पथरी का यह प्रकार बहुत कम लोगों में है। इस प्रकार की पथरी को एक बार निकाल देने के बाद भी यह दुबारा बन जाती है।
इसके अलावा गुर्दे की पथरी बनाने के कई अन्य कारण भी है। उनमे से कुछ कारण निचे दिया गए है, 
१) मोटापा 
२) थायरॉइड 
३) डिहाइड्रेशन 
४) अधिक प्रोटीन व नमक वाला भोजन 
५) कुछ विशेष प्रकार की दवा 
६) पेशाब में अधिक मात्रा में केमिकल और एसिड होने से
७) अधिक मात्रा में जंक फुड का सेवन करने से
उपरोक्त सभी किडनी स्टोन होने के कारण है। अतः अगर आप पथरी से बचाना चाहते है तो इन कारणों पर ध्यान रखना चाहिए और इससे तुरंत निजात पाने के लिए जल्द से जल्द इलाज करना चाहिए।
(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)
अगर आपको यह post पसंद आये तो comment जरूर करे और आपकी प्रसन्नता दर्शाने हेतु कृपया इसे Facebook और Twitter पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

Thursday, August 29, 2019

पथरी से निजात पाने के सबसे अच्छे और गुणकारी तरीके | Effective Home Remedies for Kidney Stone

Gurde Ki Pathri Ko Thik Karne Ke Gharelu Upay 

दुनिया में पायी जाने वाली सबसे आम बीमारियोमे पथरी (stone) एक बीमारी है, जो लगभग सभी देशोमें पायी जाती है। इसकी चपेट में आप कब आ जाओगे यह आपको पता भी नहीं लगेगा। हम इस लेख में आपको पथरी से निजात पाने के सबसे अच्छे और गुणकारी तरीकों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।


आजकल हमारे खानपान के जो गलत तरीके है उनकी वजह से पथरी (stone) होना एक आम बात हो गई है। वैसे तो पथरी होने के अनेक कारन है लेकिन डॉक्‍टर्स कहते है की, हमारे खाने में कुछ ऐसे पदार्थ शामिल होते है जिनसे पथरी होने होने की सम्भावना बढ़ जाती है। जैसे की दूध और दूधजन्य पदार्थ, टमाटर, खीरा, पालक, बैंगन, चावल आदि।

Best Medicine For Kidney Stone In Hindi

ज्यादा क्षारीय पानी या हैंडपंप का पानी पीना भी पथरी होने के अन्य कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है। ऐसा पानी पीनेसे पथरी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

आप, आपके रिश्तेदार या आपके आसपास का कोई अगर इन दिनों पथरी की बीमारी से जूझ रहा है और आप सभी तमाम दवाइयां खाकर भी इससे निजात पाने में असमर्थ हो गए हैं, तो हम इस लेख में आपको ऐसे कुछ अच्छे और गुणकारी तरीके बताने वाले है जिनकी मदद से आप हमेशा के लिए पथरी की बीमारी से निजात पा सकते हैं।

पथरी को ठीक करने के घरेलू उपाय


अजवाइन का उपयोग | Use of Celery


पथरी की बीमारी पर अजवाइन (carom seeds) एक उपाय है। अगर आप पथरी की समस्या से जूझ रहे है तो कुछ मात्रा में अजवाइन खाये या तो उसे पानी के साथ निगल लें। यह उपाय अगर आप लगातार  कुछ महीने करते रहते है तो कुछ दिनोंमे आपको  में आपको पथरी से छुटकारा मिल सकता है।

इलायची का उपयोग | Use of Cardamom


अगर आप गुर्दे की पथरी (kidney stones) से पीड़ित है तो आप इससे निजात पाने के लिए इलायची का प्रायोड कर सकते है। इसके प्रयोग के लिए एक चम्‍मच इलायची पावडर ले और उसमे खरबूजे के बीज की गिरी और मिश्री के साथ एक कप पानी में उबाल लें।

इस मिश्रण को थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दे। ठंडा होने के बाद उसे छलनी से छान ले। इसे लगातार पिने से पथरी से निजात मिल सकती है।

जीरा और चीनी का पाउडर | Cumin and Sugar Powder


गुर्दे की पथरी (kidney stones) के लिए जीरा बहोत फायदेमन्द साबित होता है। अगर आप गुर्दे की पथरी (kidney stones) से जूझ रहे है तो आप जीरा और चीनी को एकसमान प्रमाण लेके एकसाथ पीस लें। उसके बाद जो पावडर तैयार हो जाएगी उसे ठंडे पानी के साथ रोजाना लें। कुछ दिन यह उपाय करने पर आपको गुर्दे की पथरी (kidney stones) से निजात मिल सकती है।

पका जामुन | Ripe Berries


पथरी के घरेलु उपायों में से पका हुआ जामुन भी काफी फायदेमंद होता है। अगर आप, आपके रिश्तेदार या आपके आसपास का कोई पथरी की बीमारी से परेशान है तो कुछ दिनों तक लगातार इसका सेवन करने से पथरी से निजात मिल सकती है।

कच्ची भिंड़ी | Raw ladyfinger


कच्ची भिंड़ी भी पथरी से निजात दिलाने में फायदेमंद है। इसके लिए आप सबसे पहले भिंडी को अच्छी तरह से साफ करके लम्बा- लम्बा काट लें। उसके बाद एक कांच का बर्तन लेके उसमे कटी हुई भिंड़ी की डालें।

उसके बाद उस कांच के बर्तन में थोड़ा पानी डालें। जिसमे वो कटी हुई भिंड़ी पूरी तरह से डूब जाए। अब उसे रात भर के लिए ढककर रख दें। अगले दिन सुबह भिंड़ी को उसी पानी में निचोड़ कर निकाल लें। अब जो पानी रहता है उस पानी को दो घंटें के भीतर पी लें। इससे गुर्दे की पथरी (kidney stones) से छुटकारा मिल सकता है।

बथुआ | Chenopodium album


बथुआ एक तरह की हरी पत्तेदार सब्जी होती है। जिसे मराठी में चाकवत कहा जाता है। इसके उपयोग से भी पथरी से निजात पाया जा सकता है।

पथरी से निजात पाने के लिए बथुआ को पानी में अच्छी तरह उबालकर छान लें। अब उस पानी में सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीएं। यह पिने से भी गुर्दे की पथरी निकल जाती है।

(नोट: उपरोक्त सुझाव केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए हैं। अतः इसक उपयोग करने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले।)

अगर आपको यह post पसंद आये तो comment जरूर करे और आपकी प्रसन्नता दर्शाने हेतु कृपया इसे Facebook और Twitter पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।